नई दिल्ली: मार्च की विदाई के साथ ही अप्रैल की शुरुआत देशभर में मौसम के बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। भारत मौसम विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया है। कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि ओलावृष्टि की चेतावनी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
गर्मी से राहत, सामान्य से ज्यादा बारिश के आसार
इस बार अप्रैल का महीना तेज गर्मी के बजाय राहत भरा रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल से जून के बीच अधिकतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है, जिससे लू का असर सीमित रहेगा। वहीं इस महीने सामान्य से करीब 112 प्रतिशत अधिक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में तेज हवाएं और बारिश
राजधानी दिल्ली में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिनकी रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूलभरी आंधी और 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
राजस्थान, बिहार और झारखंड में अलर्ट
राजस्थान में धूलभरी आंधी का खतरा बना हुआ है। बिहार और झारखंड में बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर चेतावनी जारी की गई है। झारखंड के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तूफानी हालात
मध्य भारत में मौसम काफी अस्थिर बना हुआ है। छत्तीसगढ़ में 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। ओलावृष्टि की चेतावनी के चलते किसानों को अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट
असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम से बदला मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर पाकिस्तान और जम्मू क्षेत्र के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और देश के अलग-अलग हिस्सों में बने चक्रवाती परिसंचरण तंत्र इस बदलाव की मुख्य वजह हैं। इन सभी सिस्टम के संयुक्त प्रभाव से देशभर में मौसम अस्थिर बना हुआ है।
लोगों के लिए जरूरी सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। तेज हवाओं के समय कमजोर इमारतों और होर्डिंग्स से दूर रहें। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोग 3 से 6 अप्रैल के बीच विशेष सतर्कता बरतें, क्योंकि एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।
